Bhajan

जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स

जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स के आकर्षक भजनों की लयबद्धता में खो जाएं, जहां आध्यात्मिकता की सुगंध हर सांस के साथ आपके भीतर समा जाती है। इस भजन के माध्यम से अपने हृदय के द्वार खोलें और दिव्य प्रेम के अथाह सागर में डुबकी लगाएं। जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स का हर सुर एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो आपको जीवन की क्षणभंगुरता से परे, अनंत की ओर ले जाता है।

जिस नैया के श्याम धणी हो,
खुद ही खेवनहार,
वो नैया पार ही समझो,
बिना पतवार ही समझो।।



तूफान में कश्ती चाहे,

हिचकोले खाये,
भंवर के थपेड़े चाहे,
जितना डराये,
जग का खेवनहारा थामे,
खुद जिसकी पतवार,
वो नैया पार ही समझो,
बिना पतवार ही समझो।।



माझी बनेगा जब ये,

सांवरा तुम्हारा,
मझधार में भी तुझको,
मिलेगा किनारा,
जिसका रक्षक बनकर बैठा,
लीले का असवार,
वो नैया पार ही समझो,
बिना पतवार ही समझो।।



‘हर्ष’ तू जीवन की नैया,

इसको थमा दे,
इसके भरोसे प्यारे,
मौज तू उड़ा ले,
हाथ पकड़ ले जब ये तेरा,
फिर किसकी दरकार,
वो नैया पार ही समझो,
बिना पतवार ही समझो।।



जिस नैया के श्याम धणी हो,

खुद ही खेवनहार,
वो नैया पार ही समझो,
बिना पतवार ही समझो।।

गायक – मनोज ठठेरा।
9887101010


अंत में, जब “जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स” के अंतिम स्वर मौन में विलीन हो जाते हैं, तो इस भजन की परिवर्तनकारी शक्ति को अपने हृदय में समाहित होने दें, जो आपको आंतरिक शांति और अटल भक्ति के मार्ग पर ले जाती है।
जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स के भक्तिमय गीतों में अपने आप को खो दें, जो आपको जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं और आपको आध्यात्मिकता के एक स्वप्निल संसार में पहुँचाते हैं। हर बार जब आप “जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स” सुनते हैं, तो आप अपने भीतर एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करेंगे।

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