Bhajan

थारी माया नगरी काई काम की भजन लिरिक्स

थारी माया नगरी काई काम की भजन लिरिक्स के आकर्षक भजनों की लयबद्धता में खो जाएं, जहां आध्यात्मिकता की सुगंध हर सांस के साथ आपके भीतर समा जाती है। इस भजन के माध्यम से अपने हृदय के द्वार खोलें और दिव्य प्रेम के अथाह सागर में डुबकी लगाएं। थारी माया नगरी काई काम की भजन लिरिक्स का हर सुर एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो आपको जीवन की क्षणभंगुरता से परे, अनंत की ओर ले जाता है।

थारी माया नगरी काई काम की,

दोहा – राणो बोल्यो मीरा ने,
ये छोड़ द्यो भगवा वेश,
मेवाड़ी राणा में किज्या,
म्हारे मन में पुगे ठेस।
काई पड्यो इन भक्ति में,
थे चालो मेहला माहि,
दास्या थारी करे चाकरी,
थारी खूब चले ठकुराई।
मीरा बोली सुन राणा जी,
क्यों बाता में बिल्मावे,
म्हारे हिवड़े माहि बस,
वो सांवरियो ही भावे।



थारी माया नगरी काई काम की,

राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।bd।

दोहा – म्हारे मन के पिछले कोणे में,
वो सांवरियो छुप बैठ गयो,
काम क्रोध मद लोभ अहम,
सगलो का दुःख मेट गयो।

राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की,
मैं तो बावली भई रे हरि नाम की,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।bd।



पायो राम रतन धन मोकलो,

अब ई झूठी माया को काई सोचणो,
नहीं भावे मने चूड़ो राणा,
ना ही काजल टिकी,
नटवर नागरिया के आगे,
सगली चीजा फीकी,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।।

पायो राम रतन धन मोकलो,
अब ई झूठी माया को काई सोचणो,
म्हारी राखे खबर आठों याम की,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।bd।



मैं तो लेके एकतारा नाचूं जोर की,

मैं तो दरश दीवानी चितचोर की,
जनम जनम नहीं टूटे म्हारो,
हेत हरि से अटूट,
कहनो मेरो मान ले राणा,
तने ले चालूं वैकुण्ठ,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।।

मैं तो लेके एकतारा नाचूं जोर की,
मैं तो दरश दीवानी चितचोर की,
राणा ना कर बातां अज्ञान की,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।bd।



राणा भक्ति में शक्ति बड़ी भारी रे,

‘लक्खा’ अमृत है नाम गिरधारी रे,
जिन जिन जपियो श्याम नाम,
वो भव सु हो गयो पार,
श्याम नाम नहीं छोडूं राणा,
चाहे छूट जाए घरबार,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।।

राणा भक्ति में शक्ति बड़ी भारी रे,
‘लक्खा’ अमृत है नाम गिरधारी रे,
Bhajan Diary Lyrics,
श्याम मीरा का मीरा हो गई श्याम की,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।bd।



थारी माया नगरी काई काम की,

राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की,
मैं तो बावली भई रे हरि नाम की,
राणा जी म्हारे,
लागि लगन घनश्याम की।bd।

Singer – Lakhbir Singh Lakha Ji


अंत में, जब “थारी माया नगरी काई काम की भजन लिरिक्स” के अंतिम स्वर मौन में विलीन हो जाते हैं, तो इस भजन की परिवर्तनकारी शक्ति को अपने हृदय में समाहित होने दें, जो आपको आंतरिक शांति और अटल भक्ति के मार्ग पर ले जाती है।
थारी माया नगरी काई काम की भजन लिरिक्स के भक्तिमय गीतों में अपने आप को खो दें, जो आपको जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं और आपको आध्यात्मिकता के एक स्वप्निल संसार में पहुँचाते हैं। हर बार जब आप “थारी माया नगरी काई काम की भजन लिरिक्स” सुनते हैं, तो आप अपने भीतर एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करेंगे।

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