Bhajan

पगलिया पूजो रे गुरु जी का चंदन घोल घोल कर

पगलिया पूजो रे गुरु जी का चंदन घोल घोल कर के आकर्षक भजनों की लयबद्धता में खो जाएं, जहां आध्यात्मिकता की सुगंध हर सांस के साथ आपके भीतर समा जाती है। इस भजन के माध्यम से अपने हृदय के द्वार खोलें और दिव्य प्रेम के अथाह सागर में डुबकी लगाएं। पगलिया पूजो रे गुरु जी का चंदन घोल घोल कर का हर सुर एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो आपको जीवन की क्षणभंगुरता से परे, अनंत की ओर ले जाता है।

पगलिया पूजो रे गुरु जी का,
चंदन घोल घोल कर।

दोहा – गुरु नाम से बढ़कर दुनिया में,
दूसरा नाम क्या होगा,
जिनके पैरों के नीचे जन्नत हो,
उसके सर का मुकाम क्या होगा।



पगलिया पूजो रे गुरु जी का,

चंदन घोल घोल कर,
पुरो पूजन कर लो भक्तो,
हाथ को जोड़ जोड़ कर,
पुरो पूजन कर लो भक्तो,
हाथ को जोड़ जोड़ कर।।



मेरे बिगड़े काम संवारे,

मेरे बिगड़े काम संवारे,
मुझ को भव से पार उतारे,
मुझ को भव से पार उतारे,
मेरे बिगड़े काम संवारे,
मुझ को भव से पार उतारे,
तेरी सेवा मे रहुंगा,
हथ को जोड़ जोड़ के,
पगलिया पूजों रे गुरु जी का,
चंदन घोल घोल के।।



माला मोगरे की लाओ,

माला मोगरे की लाओ,
इन हाथो से इत्र लगाओ,
इन हाथो से इत्र लगाओ,
माला मोगरे की लाओ,
इन हाथो से इत्र लगाओ,
नही कही जाउंगा मैं गुरुवर,
तुमको छोड़ छोड़ के,
पगलिया पूजों रे गुरु जी का,
चंदन घोल घोल के।।



गुरुवर ऐसे है हमारे,

गुरुवर ऐसे है हमारे,
करते सब के वारे न्यारे,
करते सब के वारे न्यारे,
गुरुवर ऐसे है हमारे,
करते सब के वारे न्यारे,
इनके चरणों को छूलो रे,
भगतो दोड दोड के,
पगलिया पूजों रे गुरु जी का,
चंदन घोल घोल के।।



इनकी आरती उतारो,

इनकी आरती उतारो,
इनके चरणों मे शीश झुकालो,
इनके चरणों मे शीश झुकालो,
इनकी आरती उतारो,
इनके चरणों मे शीश झुकालो,
इनके जयकारे बोलो रे,
भगतो जोर जोर से,
पगलिया पूजों रे गुरु जी का,
चंदन घोल घोल के।।



पगलिया पूजा रे गुरु जी का,

हाथ को जोड़ जोड़ कर,
पुरो पूजन कर लो भक्तो,
हाथ को जोड़ जोड़ कर,
पुरो पूजन कर लो भक्तो,
हाथ को जोड़ जोड़ कर।।

गायक – लक्ष्य गुप्ता।
म्यूजिक – प्रियांशु वर्मा।


अंत में, जब “पगलिया पूजो रे गुरु जी का चंदन घोल घोल कर” के अंतिम स्वर मौन में विलीन हो जाते हैं, तो इस भजन की परिवर्तनकारी शक्ति को अपने हृदय में समाहित होने दें, जो आपको आंतरिक शांति और अटल भक्ति के मार्ग पर ले जाती है।
पगलिया पूजो रे गुरु जी का चंदन घोल घोल कर के भक्तिमय गीतों में अपने आप को खो दें, जो आपको जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं और आपको आध्यात्मिकता के एक स्वप्निल संसार में पहुँचाते हैं। हर बार जब आप “पगलिया पूजो रे गुरु जी का चंदन घोल घोल कर” सुनते हैं, तो आप अपने भीतर एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करेंगे।

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