Bhajan

बैठ नजदीक तू बाईसा के फिर ये आभास होने लगेगा

बैठ नजदीक तू बाईसा के फिर ये आभास होने लगेगा के आकर्षक भजनों की लयबद्धता में खो जाएं, जहां आध्यात्मिकता की सुगंध हर सांस के साथ आपके भीतर समा जाती है। इस भजन के माध्यम से अपने हृदय के द्वार खोलें और दिव्य प्रेम के अथाह सागर में डुबकी लगाएं। बैठ नजदीक तू बाईसा के फिर ये आभास होने लगेगा का हर सुर एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो आपको जीवन की क्षणभंगुरता से परे, अनंत की ओर ले जाता है।

बैठ नजदीक तू बाईसा के,
फिर ये आभास होने लगेगा,
बाईसा में दिखेंगे बाबोसा,
तुझको विश्वास होने लगेगा,
बैठ नजदीक तु बाईसा के,
फिर ये आभास होने लगेगा।।



बाईसा को मिली ऐसी शक्ति,

वो शक्ति है स्वयं बाबोसा,
बनके शक्ति स्वरूपा जो जग में,
करती कल्याण सबका बाईसा,
बाबोसा का है पर्चा निराला,
तुझको एहसास होने लगेगा,
बाईसा रूप में स्वयं बाबोसा,
तुझको विश्वास होने लगेगा,
बैठ नजदीक तु बाईसा के,
फिर ये आभास होने लगेगा।।



भक्तो की उलझन को बाईसा,

एक पल में ही सुलझा रही है,
नाम लेकर बाबोसा का पल में,
सबके संकट मिटा वो रही है,
हमको रस्ता दिखा रही है,
अपना प्यार लुटाये बाईसा,
जब निराश तू उदास होने लगेगा,
बाईसा के दिल मे बाबोसा,
तुझको विश्वास होने लगेगा,
बैठ नजदीक तु बाईसा के,
फिर ये आभास होने लगेगा।।



भक्ति करते जो बाबोसा से,

रखती बाईसा उनकी खबर है,
साया बनके वो चलती हमेशा,
अपने भक्तो की उंगली पकड़के,
भक्ति कर तू बाबोसा की ‘दिलबर’
वो तेरे साथ होने लगेगा,
बाईसा मे दिखेंगे बाबोसा,
तुझको विश्वास होने लगेगा,
बैठ नजदीक तु बाईसा के,
फिर ये आभास होने लगेगा।।



बैठ नजदीक तू बाईसा के,

फिर ये आभास होने लगेगा,
बाईसा में दिखेंगे बाबोसा,
तुझको विश्वास होने लगेगा,
बैठ नजदीक तु बाईसा के,
फिर ये आभास होने लगेगा।।

गायिका – सुजाता त्रिवेदी जी।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’।
नागदा जक्शन म.प्र. 9907023365


अंत में, जब “बैठ नजदीक तू बाईसा के फिर ये आभास होने लगेगा” के अंतिम स्वर मौन में विलीन हो जाते हैं, तो इस भजन की परिवर्तनकारी शक्ति को अपने हृदय में समाहित होने दें, जो आपको आंतरिक शांति और अटल भक्ति के मार्ग पर ले जाती है।
बैठ नजदीक तू बाईसा के फिर ये आभास होने लगेगा के भक्तिमय गीतों में अपने आप को खो दें, जो आपको जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं और आपको आध्यात्मिकता के एक स्वप्निल संसार में पहुँचाते हैं। हर बार जब आप “बैठ नजदीक तू बाईसा के फिर ये आभास होने लगेगा” सुनते हैं, तो आप अपने भीतर एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करेंगे।

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