Bhajan

म्हारा मुनिराज जी ओ आपरी महिमा अपरम्पार

म्हारा मुनिराज जी ओ आपरी महिमा अपरम्पार के आकर्षक भजनों की लयबद्धता में खो जाएं, जहां आध्यात्मिकता की सुगंध हर सांस के साथ आपके भीतर समा जाती है। इस भजन के माध्यम से अपने हृदय के द्वार खोलें और दिव्य प्रेम के अथाह सागर में डुबकी लगाएं। म्हारा मुनिराज जी ओ आपरी महिमा अपरम्पार का हर सुर एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो आपको जीवन की क्षणभंगुरता से परे, अनंत की ओर ले जाता है।

महिमा अपरम्पार आपरी,
लीला अपरम्पार,
म्हारा मुनिराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



संवत 1857 अमरकोट में प्रगटिया,

खुशियां छाई राजा रामसिंह घर,
मन ही मन हर्षायो,
मन ही मन हर्षायो मुनिजी,
कुमकुम पगलिया मंडिया घर में ओ हो,
कुमकुम पगलिया मंडिया घर में,
सखिया मंगल गाया,
म्हारा मुनीराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



जुना टिपणा जोशी जोया,

जोहरसिंह नाम धरायो,
शिव भक्ति रो पद पावेला,
आगम बात बताया,
आगम बात बताया जोशीजी,
दुनिया में असरज काम करेला ओ हो,
दुनिया में असरज काम करेला,
समझो बात रो साहारो,
म्हारा मुनीराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



बालपणा में परचा दीदा,

चमत्कार दिखलाया,
आंधा ने आंखीया दिया,
पांगलिया ने पगे चलाया,
जात पात भेदभाव मिटायो,
सबरी साहाय कराया,
सबरी साहाय कराया मुनिवर,
सबरी साहाय कराया,
भोला भक्ता री विनती सुनने ओ हो,
भोला भक्ता री विनती सुनने,
भवसु पार लगाया,
म्हारा मुनीराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



आबुराज संतों री धरती,
ओ भक्ति रो प्रमाण,
वास्तानजी धाम पावन,
शिव में मिलायो प्राण,
विधि-विधान रो घटणाक्रम है,
ओ केडो दिन महान,
ओ केडो दिन महान मुनिजी,
ओ केडो दिन महान,
आबुराज वास्तानजी आया ओ हो,
आबुराज वास्तानजी आया,
एक दुगा री लार,
म्हारा मुनीराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



अरे पौष महिनो सातम कईजे,

वार ने गुरुवार,
जीव शिव में आप मिलायो,
जन्म मरण रो साहर,
सिरोही नगरी मेलों मसीयो,
साधु संत नर नार,
साधु संत नर नार मुनिजी,
साधु संत नर नार,
गली-गली में सोर मसियो ओ हो,
गली गली में सोर मसियो,
बीलके है नर नार,
म्हारा मुनीराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



वास्तानजी में समाधि देराया,

शिव शरण रे माऐ,
आबुराज री तपो भुमि में,
संतो रो विश्वास,
इन धरती में वास आपरों,
इन धरती में वास,
इन धरती में वास मुनिराज,
इन धरती में वास,
म्हारा मुनीराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



दिपक गिरीजी शरणे आपरी,

सत मन ध्यान लगावे,
बग गांव रा भक्त आपरा,
शरणा शीश नवावै,
सिरोही पाली रा भक्त आपरे,
शरणे धोग लगावे,
शरणे धोग लगावे गुरुजी,
आपरें शरणें धोग लगावे,
लिखे नगाराम महिमा वखोणि ओ हो,
लिखे नगाराम महिमा वखोणि,
महेन्द्र सिंह गुण गायो,
म्हारा मुनीराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।



महिमा अपरम्पार आपरी,

लीला अपरम्पार,
म्हारा मुनिराज जी ओ,
आपरी महिमा अपरम्पार,
शमशेर गिरी जी ओ,
आपरी लीला अपरम्पार।।

गायक – महेंद्र सिंह राठौड़ प्रियंका चौहान।
Writer – Nagaram Choudhary
8618217428


अंत में, जब “म्हारा मुनिराज जी ओ आपरी महिमा अपरम्पार” के अंतिम स्वर मौन में विलीन हो जाते हैं, तो इस भजन की परिवर्तनकारी शक्ति को अपने हृदय में समाहित होने दें, जो आपको आंतरिक शांति और अटल भक्ति के मार्ग पर ले जाती है।
म्हारा मुनिराज जी ओ आपरी महिमा अपरम्पार के भक्तिमय गीतों में अपने आप को खो दें, जो आपको जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं और आपको आध्यात्मिकता के एक स्वप्निल संसार में पहुँचाते हैं। हर बार जब आप “म्हारा मुनिराज जी ओ आपरी महिमा अपरम्पार” सुनते हैं, तो आप अपने भीतर एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करेंगे।

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