Bhajan

वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ पालना पद लिरिक्स

वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ पालना पद लिरिक्स के आकर्षक भजनों की लयबद्धता में खो जाएं, जहां आध्यात्मिकता की सुगंध हर सांस के साथ आपके भीतर समा जाती है। इस भजन के माध्यम से अपने हृदय के द्वार खोलें और दिव्य प्रेम के अथाह सागर में डुबकी लगाएं। वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ पालना पद लिरिक्स का हर सुर एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो आपको जीवन की क्षणभंगुरता से परे, अनंत की ओर ले जाता है।

वारि मेरे लटकन,
पग धरो छतियाँ,
कमलनयन बलि,
जाऊं वदनकी,
शोभित नेन्ही नेन्ही,
दूधकी द्वे दतियाँ,
वारी मेरे लटकन,
पग धरो छतियाँ।।

राग – आसावरी।



यह मेरी यह तेरी,

यह बाबा नन्दजू की,
यह बलभद्र भैया की,
यह ताकि जो,
झूलावे तेरो पलना,
ईंहां ते चली,
खर खात पीवत जल,
परिहरो रुदन,
हसो मेरे ललना,
वारी मेरे लटकन,
पग धरो छतियाँ।।



रुनक झूनक पग,

बाजत पैजनियाँ,
अलबल कलबल,
बोलो मृदु बनियाँ,
परमानंद प्रभु,
त्रिभुवन ठाकुर,
जाय झूलावे बाबा,
नंद्जू की रनियाँ,
वारी मेरे लटकन,
पग धरो छतियाँ।।



वारि मेरे लटकन,

पग धरो छतियाँ,
कमलनयन बलि,
जाऊं वदनकी,
शोभित नेन्ही नेन्ही,
दूधकी द्वे दतियाँ,
वारी मेरे लटकन,
पग धरो छतियाँ।।

स्वर – भगवती प्रसाद गन्धर्व जी।


अंत में, जब “वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ पालना पद लिरिक्स” के अंतिम स्वर मौन में विलीन हो जाते हैं, तो इस भजन की परिवर्तनकारी शक्ति को अपने हृदय में समाहित होने दें, जो आपको आंतरिक शांति और अटल भक्ति के मार्ग पर ले जाती है।
वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ पालना पद लिरिक्स के भक्तिमय गीतों में अपने आप को खो दें, जो आपको जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं और आपको आध्यात्मिकता के एक स्वप्निल संसार में पहुँचाते हैं। हर बार जब आप “वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ पालना पद लिरिक्स” सुनते हैं, तो आप अपने भीतर एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करेंगे।

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