Bhajan

सोहंग शिखर में जाय मिले निज मेवा

सोहंग शिखर में जाय मिले निज मेवा के आकर्षक भजनों की लयबद्धता में खो जाएं, जहां आध्यात्मिकता की सुगंध हर सांस के साथ आपके भीतर समा जाती है। इस भजन के माध्यम से अपने हृदय के द्वार खोलें और दिव्य प्रेम के अथाह सागर में डुबकी लगाएं। सोहंग शिखर में जाय मिले निज मेवा का हर सुर एक आध्यात्मिक अनुभव है, जो आपको जीवन की क्षणभंगुरता से परे, अनंत की ओर ले जाता है।

सोहंग शिखर में जाय,
मिले निज मेवा,
जीवित मोक्ष मिल जाय,
करम ने तजणा है ओ जी।।



अके कवल के माई,

अनगढ़ देवा,
वहां होता निज प्रकाश,
अखण्ड ज्योति जलती है ओ जी।।



दस दरवाजा बाद,

ढोल गुंजेलां,
वहां वाजें मदरगं ताल,
करम तो ऐसा हैं ओ जी।।



लिगं भंग के बीच,

राम जी मेरा,
पण नुगरा मानें नाय,
कर्म नीच करता है ओ जी।।



मनक जनम की मोज,

फेर नहीं आवे,
गुण गावें गोरख नाथ,
गुरासा सेवा है ओ जी।।



सोहंग शिखर में जाय,

मिले निज मेवा,
जीवित मोक्ष मिल जाय,
करम ने तजणा है ओ जी।।

गायक – जगदीश चन्द्र जटिया।
मोबाइल – 9950647154
प्रेषक – श्री धर्मराज बावजी स्टुडियो।
मावली उदयपुर राजस्थान।


अंत में, जब “सोहंग शिखर में जाय मिले निज मेवा” के अंतिम स्वर मौन में विलीन हो जाते हैं, तो इस भजन की परिवर्तनकारी शक्ति को अपने हृदय में समाहित होने दें, जो आपको आंतरिक शांति और अटल भक्ति के मार्ग पर ले जाती है।
सोहंग शिखर में जाय मिले निज मेवा के भक्तिमय गीतों में अपने आप को खो दें, जो आपको जीवन की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाते हैं और आपको आध्यात्मिकता के एक स्वप्निल संसार में पहुँचाते हैं। हर बार जब आप “सोहंग शिखर में जाय मिले निज मेवा” सुनते हैं, तो आप अपने भीतर एक गहरी शांति और संतोष का अनुभव करेंगे।

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