पटना/मुजफ्फरपुर, 26 अगस्त 2025 – बिहार में जारी वोटर अधिकार यात्रा (Voter Adhikar Yatra) लगातार राजनीतिक तापमान बढ़ा रही है। मंगलवार को इस यात्रा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन शामिल हुए। मंच से उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला है और इसे उन्होंने “आतंकवाद से भी बदतर” बताया।
स्टालिन का सख्त बयान, भीड़ ने बजाई तालियां
मुजफ्फरपुर में हुई रैली में स्टालिन ने अपना भाषण तमिल में दिया, जिसका हिंदी अनुवाद सुनकर भीड़ ने तालियों से उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से पूरा देश बिहार की राजनीति पर नजरें गड़ाए हुए है लेकिन निर्वाचन आयोग “रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कठपुतली” बन गया है।
स्टालिन ने दावा किया कि यदि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हुए तो ‘इंडिया’ गठबंधन जीत हासिल करेगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया – “क्या 65 लाख लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाना आतंकवाद से भी बदतर नहीं है?”
INDIA गठबंधन को लेकर बड़ा वादा
रैली में स्टालिन ने लोगों से वादा किया कि अगर बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन की जीत होती है तो वह शपथ ग्रहण समारोह में फिर शामिल होंगे। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार ही वह धरती है जहां से इस गठबंधन की नींव रखी गई थी और जिसने भाजपा को 400 सीटों का दावा करने के बावजूद केवल 240 सीटों पर समेट दिया।
पटना में BJP का जोरदार विरोध, फूंका पुतला
इधर, स्टालिन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की बिहार यात्रा का भाजपा ने कड़ा विरोध किया। बुधवार को पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं का पुतला दहन किया। यह कार्यक्रम आयकर गोलंबर के पास हुआ, जहां कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव समेत विपक्षी नेताओं के खिलाफ पोस्टर और तख्तियां लहराईं।
“बिहारियों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा राज्य” – भाजपा
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि स्टालिन और रेवंत रेड्डी ने पहले बिहार और सनातन धर्म का अपमान किया था। इसके बावजूद राहुल गांधी और तेजस्वी यादव उन्हें बिहार में घुमा रहे हैं। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कहा – “यह बिहार के सम्मान और स्वाभिमान की बात है। तेजस्वी यादव को बताना चाहिए कि बिहार का अपमान करने वालों को यहां क्यों बुलाया गया?”
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान ने चेतावनी दी कि बिहार के लोग इस अपमान का जवाब आने वाले चुनाव में देंगे। उन्होंने कहा कि बिहार कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करेगा और इस बार भी जनता साबित करेगी कि बाहरी नेताओं के अपमानजनक बयानों को राज्य स्वीकार नहीं करेगा।
कुल मिलाकर, वोटर अधिकार यात्रा ने बिहार की राजनीति को नए सिरे से गरमा दिया है। एक तरफ स्टालिन और विपक्षी नेता मतदाता सूची से नाम हटाने को लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे बिहार का अपमान करार देकर सड़कों पर उतर आई है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा किस तरह से असर डालेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।