Tu Jhoothi Main Makkaar Movie Best Dialogues in Hindi – Ranbir Kapoor And Shraddha Kapoor

इस वेबसाइट पर आपको बॉलीवुड फिल्म “तू झूठी मैं मक्कार” के सभी डायलॉग मिल सकते हैं। यह फिल्म बॉलीवुड की दुनिया में रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है। “तू झूठी मैं मक्कार” में श्रद्धा कपूर और रणबीर कपूर, डिंपल कपाड़िया और बोनी कपूर के साथ हैं। फिल्म के अन्य महत्वपूर्ण अभिनेताओं में अनुभव सिंह बस्सी और इनायत वर्मा शामिल हैं। हमारी वेबसाइट फिल्म से डायलॉग प्रदान करती है। इन डायलॉग को सीखकर, आप अपने दोस्तों, सहकर्मियों या अन्य महत्वपूर्ण लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। डायलॉग विशेषज्ञ बनने के लिए नीचे “तू झूठी मैं मक्कार” के डायलॉग देखें।

“Tu Jhoothi Main Makkaar” Ranbir Kapoor & Shraddha Kapoor Dialogues

जब झूठ का खेल चलता है, तब सच्चाई चुप चाप खड़ी होती है।

झूठ की दुनिया में सच अकेला होता है, वो एक दीपक जो अंधकार को भी झिलमिला देता है।

मैं झूठ को चुनौती देने के लिए तैयार हूँ, क्योंकि सच का रंग ज़्यादा चमकदार होता है।

झूठ सिर्फ तकलीफ़ देता है, जबकि सच आत्मसम्मान और संतोष लाता है।

झूठा आदमी दिखावे का महारथी होता है, जबकि सच्चा आदमी अपने कर्मों से पहचाना जाता है।

जब तक झूठ मेरी ज़िन्दगी में राज करेगा, मैं अपने सपनों को नहीं पूरा कर पाऊंगा।

झूठ के सामरिक चलाव को तोड़कर, मैं सच की देवी की आराधना करना चाहता हूँ।

झूठ की पहचान सच्चाई के सामने होती है, वही दिखलाता है किसमत किसका साथ देती है।

सच्चाई और झूठ के बीच युद्ध में तभी सच्चाई जीतती है, जब हम उसका समर्थन करते हैं।

झूठ के साथ खेलना कोई मज़ाक नहीं होता, वह एक सांसारिक ख़तरा होता है जो हमारे अंतरात्मा को क्षोभित करता है।

जब सच बोलने का समय आता है, तो झूठ ख़ुद बोलता है जबकि मुझे यकीन है, सच जीत हीत नहीं होता।

झूठ सिर्फ दिखावा करता है, मगर सच सबको निहारता है।

मेरे लिए सच्चाई की कीमत झूठ से हज़ार गुना ज़्यादा है।

जब तक झूठ मेरी जिंदगी में छाया रहेगा, मैं खुद को खो दूंगी और सच्चाई को पाने की कोशिशें नहीं कर सकूंगी।

झूठ एक दगाबाज़ी है, जो सच्चाई को परेशान करती है।

झूठ के सिर में झूठ, दिल में दर्द और रूह में बेचैनी होती है।

झूठ बोलने का आदत ख़ुद को धोखा देने की आदत होती है।

मैं झूठ के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हूँ, क्योंकि सच जीतने का वक्त आ चुका है।

झूठ का दहेज़ अस्थायी होता है, जबकि सच निर्मलता और स्थायित्व लाता है।

झूठ से पहले भयंकर होता है सच्चाई का सवाल, लेकिन झूठ के बाद उससे अधिक भयंकर कोई चीज़ा नहीं होती।